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स्वयं की देखभाल

स्वयं की देखभाल है अनिवार्य

लगभग सभी अपने जीवन में तनाव का सामना करते हैं, और जो “लोगों के साथ प्रत्यक्ष रूप से काम करते है (पीपल वर्क)” उनके मामले में यह और अधिक होता है। लंबे समय तक तनाव, उन क्षेत्रों में हमारी रुचि या उत्साहित होने की क्षमता को कम कर सकता है जिनसे हमारा गहराई से लगाव होता है या जो हमें प्रेरित करने वाले होते हैं – इस स्थिति को बर्नआउट कहते हैं। अगर हम बर्नआउट होने से पहले ही तनाव को संभालने के तरीके खोज सकें, तो? इस वेबसाइट में हम आत्म-देखभाल करने के तरीकों, और संसाधनों को शामिल करते हैं जिससे लोगों के साथ काम करने वाले व्यक्तियों को तनाव को संभालने और बर्नआउट को रोकने में मदद मिल सकती है। 

तारशी (TARSHI)  के इस क्षेत्र में कई वर्षों के काम से हम जानते हैं कि “लोगों के साथ काम करने वाले” और खासकर जेंडर और यौनिकता से संबंधित मुद्दों पर – जो भारतीय और दक्षिण एशियाई समाजों में वर्जित हैं – काम करने वालों में तनाव और बर्नआउट की गुंजाइश अधिक होती है। अक्सर, लोगों के साथ काम करने में दूसरों के कठिन परिस्थितियों में अनुभवों को सुनने और उनसे बातचीत करने का काम शामिल होता है और कभी कभी इसके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति के दर्द को कम करने के लिए हम शायद ही कुछ और कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, इस तरह के मुद्दों पर काम करने वाले भी अपने अंदर की आवाज़ के कारण इस काम से जुडते हैं, जो इस मुद्दे को अपने स्वयं के जीवन के साथ भी करीब से जोड़ते हैं, जिससे आत्म-देखभाल को प्राथमिकता देना मुश्किल हो जाता है। एक्टिविस्टों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लोगों में विशेष रूप से तनाव प्रबंधन और बर्नआउट की रोकथाम पर ध्यान न देने की संभावना होती है।

इस वेबसाइट के साथ, हम, एक्टिविस्ट, काउन्सिलर जैसे लोगों को आत्म-देखभाल को केंद्र में रखने के लिए मदद करना चाहते हैं – क्योंकि आपको आत्म-देखभाल और खुशहाली का अधिकार है। क्योंकि तनाव या बर्नआउट दूसरों की मदद करने की आपकी क्षमता को कम करेगा।

क्या तनाव को संभालना और बर्नआउट रोकथाम केवल एक व्यक्तिगत चिंता है? नहीं।

तनाव प्रबंधन और बर्नआउट की रोकथाम केवल एक अकेले की ज़िम्मेदारी नहीं है। मानव एक पर्यावरण तंत्र (ecosystem) का हिस्सा है, जो कई संस्थानों – परिवार, कार्यस्थल, आंदोलनों, बड़े समाजों, इत्यादि से संबंधित है। तनाव के कुछ बड़े स्रोत हमारे नियंत्रण से परे हैं – जैसे कि, पितृसत्ता, एबलिस्म यानि गैर-विकालांग व्यक्तियों के पक्ष में भेदभाव, होमोनेगेटिविटी यानि समलैंगिकता के प्रति नकारात्मक सोच, जाति आधारित भेदभाव और बहुत कुछ। लेकिन इसके बावजूद,  हमारे कार्यस्थलों जैसी संस्थाएं और समूह हमारे तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसीलिए, यह वेबसाइट सामूहिक देखभाल (collective care) पर भी जानकारी और संसाधन उपलब्ध कराती है (हम हिंदी में भी जल्द ही और भी संसाधन शामिल करने की उम्मीद करते हैं)। जो कारक व्यक्तियों में, विशेष रूप से उनमें जो लोगों के साथ काम करते हैं – तनाव और बर्नआउट पैदा करते हैं। उनके बारे में अधिक जानने के लिए, नज़रिया के साथ हमारे काम की इस रिपोर्ट को पढ़ें।

यह वेबसाइट आपकी मदद कैसे कर सकती है?

इस वेबसाइट को अपनी आत्म-देखभाल (सेल्फ-केयर) की यात्रा में एक मार्गदर्शक या साथी के रूप में समझिए। और संभवत: आपकी आत्म-देखभाल यात्रा इस वेबसाइट के आने से पहले शुरू हो चुकी होगी और हमें उम्मीद है कि यह बाद में भी लंबे समय तक जारी रहेगी!

इस वेबसाइट में कुछ संसाधन और पढ़ने के लिए सामग्री है (ज़्यादातर अंग्रेजी में, लेकिन जल्द ही हिंदी में आ रही है) जो आपकी मदद कर सकती है:

  • कुछ भी आपको कैसे, कब और क्यों प्रभावित करता है और तनाव का कारण बनता है, समझने के लिये
  • अपने अंदर झाँकने के लिये और विकास, स्वास्थ्य और खुशहाली में अपने मूल्यों, प्रेरणाओं, इच्छाओं और चुनौतियों को देखने और सोचने के लिये। आपकी वास्तविकताओं और आपके मूल्यों, प्रेरणाओं और इच्छाओं के बीच का कोई अंतर कैसे शायद तनाव से जुड़ा हो सकता है, समझने के लिये
  • इस जागरूकता और चिंतन के आधार पर, उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिये जो आपके नियंत्रण में हैं और व्यक्तिगत स्तर, या एक सामूहिक / संगठनात्मक स्तर – उनपर छोटे कदम उठाने के लिये। अपने व्यक्तित्व के उन हिस्सों को फिर से प्राप्त करने के लक्ष्य से जो आपको लगता है कि आपने कहीं पीछे छोड़ दिये हैं
  • कुछ कदम हमारे एकदम आसपास के वातावरण को बेहतर बनाने के लिये 

यह वेबसाइट आपको रुककर आराम करने और चैन से साँस लेने में मदद करने का प्रयास करती है, ताकि आप यह सोच सकें कि आप आज यहाँ क्यों हैं और यहाँ से आप कहाँ जाना चाहते हैं। इसमें ऐसी कई चीज़ें शामिल हैं जिससे हमें आशा है कि आप मुस्कुराएंगे, शांत महसूस करेंगे, आत्मनिरीक्षण करेंगे, आनंद लेंगे और प्रेरित होंगे।

कुछ तत्व आपके लिए व्यक्तिगत रूप से उपयोग करने के लिए हैं, जबकि कुछ तत्व आप किसी मित्र या सहयोगी को आमंत्रित कर, साथ में उपयोग कर सकते हैं।

और कुछ अन्य तत्व हैं जिन पर आप अपने संगठनात्मक या सामूहिक स्थान में उपयोग कर सकते हैं।

हालाँकि यह वेबसाइट उन लोगों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है जो लोगों के साथ काम करते हैं, लेकिन हमें विश्वास है कि ये संसाधन तनाव को कम करने के तरीकों की तलाश कर रहे लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।

तारशी (TARSHI) एक एनजीओ है जो यौनिकता पर काम करता है। हमने यह वेबसाइट क्यों बनाई है?

यौनिकता एक बहुत ही वर्जित क्षेत्र है, जो मानव जीवन के लगभग सभी पहलुओं –  स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और सार्वजनिक स्थानों जैसे संसाधनों तक किसे पहुँच मिलती है से लेकर, हमारे जीवन और न्याय के मौलिक अधिकारों तक – में नज़र आती है। यौनिकता और जेंडर पर आधारित हाशिए पर रहने वाले लोगों के अनुभव भारी तनाव के स्रोत हैं क्योंकि वे रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं और साथ ही हमारी खुशहाली के सम्पूर्ण अर्थ को भी प्रभावित कर सकते हैं। इन मुद्दों पर काम करने वालों के लिए, लोगों और उनके संघर्षों के साथ जुड़ना भारी तनाव ला सकता है, खासकर जब उन्होंने खुद इस तरह के हाशिए पर होने का अनुभव किया हो (या अभी भी अनुभव कर रहे हों)। जो अपनी यौनिकता, और / या जेंडर पहचान के कारण शायद हाशिए की जिस स्तिथि का सामना कर रहे होते है – जाति, विकलांगता की स्थिति, वर्ग, ग्रामीण या शहरी स्थान, धर्म इत्यादि, जैसे कई कारक उसमें जुड़ सकते हैं।

तारशी (TARSHI) के यौनिकता पर काम करने वाले अनुभवों ने तनाव प्रबंधन के लिए हमारे दृष्टिकोण को आकार दिया। 1996 में, तारशी (TARSHI) का आरंभ एक हेल्पलाइन के रूप में हुआ, और हमारा काम यौनिकता, और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य (एसआरएच) से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर लोगों को परामर्श, सूचना और रेफरल प्रदान करना था। तनाव प्रबंधन और बर्नआउट रोकथाम पर हमारे शुरुआती काम ने हमारी काउंसलिंग टीम को इस काम को करते समय अपनी खुशहाली का प्रबंधन करने में मदद करना शुरू किया।

समय के साथ, हमने महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों के मुद्दों पर काम करने वाले संगठनों – जो उन समुदायों से हैं जो अपने जेंडर और / या यौन पहचान, अभिव्यक्ति, और यौनिकता के अन्य पहलुओं के कारण हाशिए पर हैं –  के लिए आत्म-देखभाल, तनाव प्रबंधन और बर्नआउट रोकथाम पर अपना काम बढ़ाया । हमने उन संगठनों के साथ भी तनाव प्रबंधन का काम किया है जो विशेष रूप से यौनिकता पर काम नहीं करते हैं, लेकिन लोगों के साथ काम करते हैं, जैसे कि शरणार्थियों के साथ। 

यह वेबसाइट आत्म-देखभाल, तनाव प्रबंधन और बर्नआउट रोकथाम पर संसाधनों और विचारों का एक संग्रह है। यह इस क्षेत्र में हमारे काम, वर्षों से तारशी (TARSHI)  के सदस्यों के अनुभवों पर आधारित है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात, हमारे कार्यशाला के प्रतिभागियों द्वारा साझा किए गए अनुभवों पर आधारित है।

समय के साथ, हम हिंदी में और अधिक संसाधनों को जोड़ने की उम्मीद करते हैं। लेकिन इस बीच, आप संसाधनों, अभ्यासों और विचारों के लिए सेल्फ केयर वाले भाग को देख सकते हैं, जिनका उपयोग आप तनाव प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत रूप में भी कर सकते हैं। सामूहिक देखभाल (collective care) वाले भाग में संसाधन और अभ्यास भी हैं जो एक सामूहिक स्थान – संगठन, समूह – अपने स्थान को आत्म-देखभाल के अनुकूल बनाने के लिये विचार कर सकते हैं। Our work वाले भाग में हमारे बारे में और अधिक जानें और तारशी (TARSHI) के प्रासंगिक संसाधनों का लाभ उठाएँ।

इस बीच में,  तनाव, बर्नआउट, आत्म-देखभाल और कार्यस्थलों / समूहों के बारे में पूछे जाने वाले कुछ सामान्य प्रश्न यहाँ दिये गये हैं।

तनाव क्या है?

तनाव अधिकांश लोगों के जीवन का एक हिस्सा है, और इसे चिकित्सा और गैर-चिकित्सा दृष्टिकोण से समझा जा सकता है। लेकिन जिस भी तरीके से हम तनाव को समझते हैं, एक चीज़ है जिस पर हम सभी सहमत हो सकते हैं: तनाव की जड़ें भौतिक और मनोवैज्ञानिक संदर्भों में हैं। जब कोई तनाव महसूस करता है, तो तनाव के प्रभावों को शारीरिक और भावनात्मक रूप से महसूस किया जा सकता है, और यह प्रभाव अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग समय पर भिन्न होता है। हर एक की तनाव होने पर प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

स्रोत: आवकश्यता आंकलन: भारत में लिंग और यौनिकता के मुद्दों पर काम करने वाले केस वर्कर्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए तनाव प्रबंधन और बर्नआउट की रोकथाम – यहाँ डाउनलोड करें

तनाव के प्रभाव किस प्रकार के हो सकते हैं?

हम सब स्वयं एक पर्यावरण तंत्र (ecosystem) हैं, और मन और शरीर के सम्बन्ध को हमने अभी समझना शुरू किया है। तनाव हम सबको को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है। कुछ लोग तनाव के मनोवैज्ञानिक प्रभावों को महसूस कर सकते हैं, जबकि कई अन्य लोग इसका प्रभाव अपने शरीर में भी देख/महसूस करते हैं – सिरदर्द और पाचन, नींद और भूख पर कुछ प्रभाव होना सामान्य लक्षण हैं। तनाव शारीरिक दर्द के रूप में भी महसूस हो सकता है। 

जहाँ किसी एक पर तनाव के प्रभाव काफ़ी चिंताजनक हैं, वहीं तनाव हमारे पर्यावरण और हमसे जुड़े लोगों को भी प्रभावित करता है। आपको यह पता चल जाना संभव है कि कब आपके – परिवार का कोई सदस्य, प्रियजन या सहकर्मी – आपके तनाव के प्रभावों को महसूस कर रहे है। तनाव किसी के रिश्ते, स्वास्थ्य, रुचि और उनके काम करने की क्षमता को छोटे या लंबे समय के लिए प्रभावित कर सकता है, और संभवतः हम जिन मूल्यों में विश्वास करते है उनपर सवाल उठा सकता है।

अगर हम तनाव महसूस कर रहे है तो हमे क्या करना चाहिए?

तनाव हमारे जीवन का एक हिस्सा है, इसलिए तनाव को दूर करने की बजाय, हमें इससे निपटने के बेहतर तरीकों को खोजने में अधिक सशक्त बनना होगा। जब आत्म-देखभाल हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग होता है, तो इससे हमें छोटे, रोजमर्रा के तनाव को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलती है। समय के साथ, आत्म-देखभाल हमारे अंदर समुत्थान शक्ति (रिज़ीलिअंस) का निर्माण करने में भी मदद करती है, जिससे हमें तनाव की स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिलती है। आत्म-देखभाल का एक हिस्सा नियमित रूप से हमारे मूल्यों पर चिंतन करने और खुद को यह याद दिलाने के बारे में भी है – कि हम जो करते हैं वो क्यों  करते हैं।

आत्म-देखभाल में बहुत आसान तरीके शामिल हो सकते हैं जैसे गहरी साँस लेना, जो तनाव के शारीरिक प्रभावों को तुरंत कम कर सकते हैं। या किसी तरह का ब्रेक लेना – जैसे कि संगीत सुनना या कुछ सुकून देने वाली चीज़, या तनावपूर्ण वातावरण से ध्यान बाटने वाला काम जैसे बाहर निकलना, कुछ गर्म, आराम देने वाली चीज़ पीना इत्यादि।

इसके बावजूद, क्योंकि तनाव विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है – व्यक्तिगत, संगठनात्मक या सामाजिक – आत्म-देखभाल की सरल गतिविधियां जो  ऊपर उल्लेख की गई  है, लंबे समय में शायद हमेशा प्रभावी न हों। इन कारकों पर  एक व्यक्तिगत के रूप में  नहीं, बल्कि एक बड़े संगठन, सामूहिक या समाज के एक व्यक्तिगत हिस्से के रूप में, भी काम करना आवश्यक है। 

इस वेबसाइट पर, हमारे पास तनाव कम करने के बारे में आपके लिए कई तरीके हैं (यह पेज अंग्रेज़ी में है और जल्द ही हिंदी में आ रहा है)।

बर्नआउट क्या है?

बर्नआउट को लंबे समय तक तनाव के परिणाम के रूप में समझा जा सकता है, जिससे न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से, थकावट की स्थिति हो जाती है; एक बुरी तरह से थकान की स्थिति और ऐसे क्षेत्रों में, जिनके प्रति हमारी गहरी प्रतिबद्धता थी उनमें रुचि, या प्रेरणा को बनाए रखने में असमर्थता की स्थिति।

स्रोत: आवकश्यता आंकलन : भारत में लिंग और यौनिकता के मुद्दों पर काम करने वाले केस वर्कर्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए तनाव प्रबंधन और बर्नआउट की रोकथाम – यहाँ डाउनलोड करें

बर्नआउट कोई अस्थायी स्थिति नहीं है, जिसमें हम आज बर्नआउट महसूस करे लेकिन कल हमे ठीक लगे, न ही बर्नआउट अचानक से दिखाई देता है। यह धीरे-धीरे महसूस होने लगता है और अगर इसकी पहचान की जा सके तो इसे रोका जा सकता है। यही कारण है कि बर्नआउट होने के बाद उसे संबोधित करने के बजाय बर्नआउट को रोकने के लिए काम करना आसान है – और क्यों आत्म-देखभाल और तनाव प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संगठन / समूह की भी है (न कि केवल एक अकेले की)।

हमे कैसे पता चलेगा कि हम बर्नआउट की स्तिथि में है?

लोगों के साथ काम करने वालों में बर्नआउट के साथ विभिन्न अहसासों, भावनाओं और अनुभवों को जोड़ा गया है जैसे की अपराध, क्रोध, उदासी, निराशा की भावना या “चीजें कभी नहीं बदलेंगी”, इत्यादि। कुछ अन्य लोगों के लिए, जिनके साथ वे काम कर रहे हैं (खुद को उन लोगों से अलग देखने में सक्षम होने के लिए) सीमाएं खींचना बहुत मुश्किल हो सकता है। कुछ को अपने काम के लिए प्रेरित बने रहना मुश्किल हो सकता है।

कई लोगों के लिए, यह सोने में कठिनाई, भूख न लगना, बाल झड़ना या वजन कम होना और उनके स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। 

बर्नआउट की स्तिथि सबके लिए अलग-अलग हो सकती है।

हम तनाव को प्रबंधित करने और बर्नआउट को रोकने में सामूहिक देखभाल के महत्व को दोहराना चाहते हैं, क्योंकि किसी के लिए यह जानना कि उन्हें इसपर काम करने की ज़रूरत है – या इसे कहाँ से शुरू करें – मुश्किल हो सकता है!

बर्नआउट को संबोधित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम क्या हैं?

  1. बर्नआउट को पहचानना पहला कदम है – बर्नआउट चुपचाप दबे पाँव आ सकता है क्योंकि  यह अक्सर समय के साथ जमा होते तनाव का एक रूप होता है। यही कारण है कि कार्यस्थलों या सामूहिक संस्थाओं को बर्नआउट के लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए और जागरूक होना चाहिए कि क्या कोई सदस्य बर्नआउट के कगार पर तो नहीं है। यह संगठनों और सामूहिक संस्थाओं के हित में भी है कि वे व्यक्तियों और संगठनों / सामूहों दोनों स्तरों पर बर्नआउट और उसके प्रभावों की वास्तविकताओं से अवगत रहें। उदाहरण के लिए, बर्नआउट उन सदस्यों की उन क्षेत्रों में रुचि या प्रेरित होने की क्षमता को कम कर सकता है जिनमें कभी उन्हें गहराई से रुचि थी या जो उन्हें प्रेरित करते थे। कार्यस्थल / सामूहिक संस्था में नीतियां स्थापित करना सदस्यों को तनाव का प्रबंधन करने और बर्नआउट को रोकने में मदद करने के लिए अनिवार्य है।
  2. अपने तनाव और बर्नआउट के स्रोत की पहचान करना भी महत्वपूर्ण है – चाहे वह पूरी तरह से काम पर हो, घर पर हो, किसी का अपना स्वास्थ्य हो, और यह देखना भी ज़रूरी है कि क्या इसमें तुरंत परिवर्तन करना आपके नियंत्रण में है। लंबी अवधि तक आत्म-देखभाल के लिए विभिन्न उपकरणों / तकनीकों की पहचान कर के और उन्हें दिनचर्या में शामिल कर के तनाव को प्रबंधित करने के लिए एक आत्म-देखभाल योजना तैयार करने में समय और ऊर्जा का निवेश करना चाहिए।
  3. यदि कार्य / कार्यस्थल बर्नआउट का स्रोत है, तो क्या आपका संगठन आपके काम को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद कर सकता है, और / या आपके कार्यों को दोबारा विभाजित किया जा सकता हैक्या वे आपकी सीमाओं को निर्धारित करने में आपकी सहायता कर सकते हैं जो आपके तनावों को कम / दूर कर सकें? अंत में, आप इस पर आत्म-निरीक्षण कर सकते हैं, कि क्या कार्य आपके मूल्यों और लक्ष्यों के साथ तालमेल में है, और इस चिंतन के आधार पर अगले चरणों के बारे में सोचा जा सकता है।
  4. उन अलग-अलग सहायता प्रणालियों को पहचानें जहाँ बर्नआउट पर चर्चा की जा सकती है और जो आलोचना से परे हैं और सुरक्षित हैं – चाहे वो दोस्त हों, परिवार, कार्यक्षेत्र या सामूहिक संस्था हों। पहचानें कि कब ऊपर बताई गयी प्रणालियों की सहायता के अलावा थेरेपी और दवा के रूप में बाहरी मदद की ज़रूरत हो सकती है।

स्वयं की देखभाल / आत्म-देखभाल क्या है?

सरल तरीके से, स्वयं की देखभाल को खुद की देखभाल करने और स्वयं के लिए सकारात्मक चीज़ें करने के रूप में समझा जाता है। इसका मतलब है कि अन्य गतिविधियों और चिंताओं से समय निकालने का प्रयास करना। आत्म-देखभाल इस बात की पुष्टि करती है कि आत्म या स्व: महत्वपूर्ण है और उस स्व: की देखरेख कम से कम उतनी महत्वपूर्ण तो है जितनी कि किसी और की देखभाल करना या खुद से ज़्यादा बाहर की चिंताओं को संबोधित करना।

आजकल आत्म-देखभाल का मतलब लाड-प्यार, स्पा, खरीदारी वगैरह हो गया है। हालाँकि आत्म-देखभाल के इन तरीकों में से किसी में भी कुछ गलत नहीं है, हम इस बात पर ज़ोर देना चाहते हैं कि आत्म-देखभाल इनकी तुलना में कहीं अधिक है।

आत्म-देखभाल एक नारीवादी और मानवाधिकार का मुद्दा है, क्योंकि हममें से जो लोगों के साथ काम करते हैं, उनकी खुद की देखभाल उनकी प्राथमिकताओं की सूची में बहुत नीचे होती है, यदि होती भी है तो। उन लोगों में से कई, जिन्होंने दूसरों के लिए देखभाल करने को अपने जीवन और काम का उद्देश्य बनाया है, खुद की देखभाल करना भूल जाते हैं, इसे स्वार्थी होना मानते हैं, या इसके लिए उन्हें दोषी महसूस कराया जाता है – और यही वजह है कि, खुद के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है जबकि यह अनिवार्य है। अगर हम लोगों के साथ काम करने वालों के बारे में विशेष रूप से बात नहीं भी कर रहे हैं, तो भी सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से लोग ऐसे बन जाते हैं जो खुद के लिए समय नहीं निकालते हैं जैसे कि एक माँ, अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करने वाले, किसी बुज़ुर्ग या विकलांगता के साथ रह रहे लोगों की देखभाल करने वाले, इत्यादि।

आत्म-देखभाल एक ऐश की तरह लगता है। हाशिए पर रह रहे समुदायों के लोग इसको कैसे कर सकते हैं?

हम जानते हैं कि दुर्भाग्य से हमारे परिवारों, व्यक्तिगत संबंधों और कार्यस्थलों में आत्म-देखभाल का कई लोगों द्वारा मज़ाक उड़ाया जाता है। और उस आत्म-देखभाल को पूंजीवादी / बाज़ार ताकतों द्वारा सहयोजित किया गया है जो आत्म-देखभाल की अवधारणा को खरीदे गए उत्पाद या सेवा से जोड़ते हैं। लेकिन कुछ लोग जो आत्म-देखभाल को पूंजीवादी नहीं मानते हैं –  जाति, वर्ग, शिक्षा का स्तर, भौगोलिक स्थिति, या विकलांगता स्थिति के संदर्भ में इसे विशेषाधिकार के रूप में मानते हैं। उदाहरण के लिए, दिन का काम खत्म होने के बाद सैर करने के लिए जाना इन सबपर निर्भर करता है – एक सुरक्षित और अच्छी तरह से रोशन जगह खोजना, देखभाल या गृहकार्य की ज़िम्मेदारियों से कुछ समय निकाल पाना, या परिवार / जिनके साथ हम रहते हैं उन्हें सफाई देनी पड़े। ये सभी विशेषाधिकार हैं जो हम जानते हैं कि कई लोगों के लिए सुलभ नहीं हैं। 

लेकिन आत्म-देखभाल एक हाल का नवीन विचार नहीं है।

हम जानते हैं कि आत्म-देखभाल की विधियाँ लोगों के जीवन का हिस्सा रही हैं – बस शायद उन्हें इस तरीके से नहीं देखा गया है। हमारे पसंदीदा उदाहरणों में से एक ऐसी महिला का है, जो उत्तरी भारत के एक गाँव में अपने बचपन के दिनों को याद करती है, जहाँ महिलाएँ मौसमी तौर पर पापड़ या अचार बनाने के लिए इकट्ठा होती थीं, और यह उनके लिए एक मौका होता था कि वे नियमित रूप से विभिन्न चीजों के बारे में बातें करते हुए एक साथ घंटों बिताती थी और उनसे कोई सवाल नहीं किया जाता था। 

गतिविधि या दृष्टिकोण कोई भी हो फर्क नहीं पड़ता, हर एक को आत्म-देखभाल और खुशहाली का अधिकार है।

क्या धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधियाँ आत्म-देखभाल का हिस्सा हो सकती हैं?

आत्म-देखभाल सभी के लिए अलग-अलग है। यदि धार्मिक या आध्यात्मिक अनुभव किसी को रुचिकर लगते हैं, तो वो भी आत्म-देखभाल के दायरे में आ सकते हैं।

इसके बाद भी, हम जानते हैं कि धर्म और आध्यात्मिकता के कई पहलू कुछ लोगो को बहिष्कृत करने वाले हो सकते हैं और इसलिए शायद यह हम में से कुछ लोगों को रास न आए या इन्हें आत्म-देखभाल न माना जाए। हम इस बात से अवगत हैं कि ऐसे लोग भी हैं जो इन अनेकानेक पहलुओं से रूबरू होते हैं, जैसे कि कोई जो अनीश्वरवादी या नास्तिक है, या किसी अलग संस्कृति या धर्म से है, लेकिन फिर भी योग का अभ्यास करते है।

कार्यस्थलों के संदर्भ में आत्म-देखभाल, तनाव प्रबंधन और बर्नआउट की रोकथाम पर चर्चा क्यों की जानी चाहिए?

शुक्र है, तनाव और बर्नआउट की अवधारणाएं पेशेवर जगत में तेज़ी से फैल रही हैं और इन्हें गंभीरता से लेने के लिए संगठन बनाए जा रहे हैं। डब्ल्यू.एच.ओ. ने अपने 11वें संशोधन में इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ़ डिसीज़ (आईसीडी- 11) में कार्यस्थल बर्नआउट को एक व्यावसायिक स्थिति के रूप में मान्यता दी है। हालाँकि, तनाव और बर्नआउट पर बातचीत को अभी भी मानसिक स्वास्थ्य के साधनवादी विचारों से जोड़ा जाता है – अर्थात, तनाव और बर्नआउट का प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका मतलब कार्यक्षेत्र या आंदोलन में उत्पादकता / कार्यकुशलता में सुधार होगा। हम इस संबंध को चुनौती देना चाहते हैं क्योंकि यह केवल तभी तक देखभाल को महत्वपूर्ण मानता है जब तक कि कोई उत्पादक है या आर्थिक रूप से समाज में योगदान कर रहे है। 

तनाव और बर्नआउट जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं – काम से लेकर स्वास्थ्य से लेकर रिश्तों तक, और अगर लंबे समय तक इनको न संभाला जाए तो यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या भी बन सकता है। इसलिए, आत्म-देखभाल एक मानवीय चिंता है, केवल उत्पादकता-संबंधी मुद्दा नहीं है। और आर्थिक योगदान या उत्पादकता का विचार लोगों के एक विशाल समूह को छोड़ देता है – जो अवैतनिक देखभाल कार्य या घरेलू श्रम करते हैं; जिनके काम को स्वैच्छिक या “परिवार / समाज की सेवा में होने” के रूप में देखा जाता है।

कार्यस्थलों और सामूहिक संस्थानों के लिए तनाव प्रबंधन और बर्नआउट रोकथाम पर सहकर्मियों / सहयोगियों का समर्थन करना क्यों महत्वपूर्ण है?

यह एक दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता है कि कार्यस्थलों में भी, जहाँ तनाव और बर्नआउट को स्वीकार किया जाता है, उन्हें संबोधित करने की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से व्यक्ति के ऊपर होती है। ऐसे में कार्यस्थलों या टीम के अन्य सदस्यों की ज़िम्मेदारियों पर विचार किए बिना “आप अपने ऊपर बहुत काम/ज़िम्मेदारी ले रहे हैं” या “आपको सीमाएं निर्धारित करना सीखना चाहिए” जैसे वाक्यांश आम तौर पर सुने जाते हैं।  

तनाव प्रबंधन और बर्नआउट की रोकथाम केवल व्यक्तियों की ज़िम्मेदारी नहीं है। हम सब एक पर्यावरण तंत्र का हिस्सा हैं, जो कई संस्थानों – परिवार, कार्यस्थल, आंदोलनों, बड़े समाजों इत्यादि – से संबंधित है। इसीलिए, यह वेबसाइट किसी के भी द्वारा सामना किए गए तनाव को कम करने में सामूहिक देखभाल (collective care) की भूमिका पर सूचना और संसाधनों को भी शामिल करती है। 

कार्यस्थलों और सामूहिक संस्थाओं को अपने सदस्यों को बेझिझक अपने काम के बारे में या किसी आंदोलन के हिस्से के रूप में काम से होने वाले तनाव को संबोधित करने के उपायों के बारे में बात करने, समाधान खोजने और बातचीत करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना चाहिए। इस चर्चा को संगठन की प्रबंधन की शैली या सामूहिक संस्था के इरादे पर सवाल उठाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए,  हालाँकि यदि कई सदस्य काम करने के तरीके के कारण तनाव के मुद्दों को उठाते हैं तो सामूहिक संस्था को अपने काम करने के तरीके पर संयुक्त रूप से चर्चा करनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तरह की चर्चाओं को सामूहिक संस्था के सदस्यों की रुचि या क्षमता की निंदा करे बिना, साथ मिलकर, कोई उपाय निकलना चाहिए।

तारशी (TARSHI) में, हम दृढ़ता से मानते हैं कि घर, परिवार, कार्यस्थल / अनौपचारिक समूह / सामूहिक संस्था / आंदोलन, शैक्षिक संस्थान इत्यादि, सुरक्षित, समावेशी और यौनिकता संबंधी सकारात्मकता (Safe, Inclusive, and Sexuality-Affirming SISA / सीसा) की पुष्टि करने वाले होना चाहिए। सीसा (SISA) स्थान एक ऐसा वातावरण प्रदान करता है जो गैर-आलोचनात्मक, अधिकार-आधारित और यौनिकता की पुष्टि करता है, जहाँ लोग अपनी यौनिकता और खुशहाली के बारे में और / या अनुभव करने के बारे में बात करने के लिए सुरक्षित और स्वतंत्र महसूस कर सकते हैं।

इस तरह के स्थान केवल तभी सीसा (SISA) हो सकते हैं जब वे सदस्यों को इस अभिव्यक्ति के लिए प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने के डर के बिना अपने प्रबंधकों और अन्य टीम के सदस्यों के साथ अपने तनाव और चिंताओं के बारे में समझने, स्वीकार करने और स्वतंत्र रूप से बात करने का अवसर प्रदान करते हैं।

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